बचपन का प्यार

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Bachapan Ka Pyar

प्रिय पाठको आज मै आप लोग को जो कहानी सुनाने जा रहा हु। यह एक सच्ची घटना पर आधारित है। और यह कहानी हर एक के जीवन का एक भाग है। आप लोग इस कहानी को एक बार पूरा पढ़िए मुझे आशा नहीं पूरा विस्वाश है की आप लोगो को यह कहानी आप के जीवन से रिलेटेड ही लगेगी चलिए सुरु करते है इस कहानी को।

एक शहर में एक छोटा सा लड़का राज अपने माता पिता के साथ में रहता था। उसके पिता जी की एक छोटी सी दुकान थी। जिस दुकान से उनके घर का खर्चा चलता था। और उसी शहर में एक गुड़िया नाम की एक छोटी सी लड़की अपनी मां पिता के साथ में रहती थी। गुड़िया के पापा एक ब्यापारी थे और शहर के नामी अमीरो में उनकी गिनती होती थी। राज और गुड़िया का घर एक ही मोहल्ले में था। राज एक स्कूल में पढ़ता था और गुड़िया किसी दूसरे स्कूल में। राज पढ़ने में बहुत ही अच्छा था और वह क्लास का टॉपर था हमेसा सबसे ज्यादा नंबर उसी का आता था। लेकिन राज जिस स्कूल में पढाई करता था उस स्कूल का प्रिंसिपल बहुत ही सख्त थे। वह किसी को भी नहीं छोड़ते थे जो गलती करता उसको वह बहुत मारते थे। अब उसके डर से कोई भी बच्चा जल्दी कोई शैतानी नहीं करता था। और राज का भी हालत ख़राब रहता था उनको देख के।

एक दिन की बात है गांधी जयंती आने वाला था और राज जिस स्कूल में पढ़ता था वहा पर गाँधी जयंती बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता था। तो उसी का तैयारी चल रहा था। बहुत सारे बच्चे गाना गाने के लिए भाग लिए थे और उसी का तैयारी चल रहा था। और बाकि बच्चो का क्लास चल रहा था। राज भी क्लास में पढाई कर रहा था। तभी उसके प्रिंसिपल का पीरियड आने वाला था और उन्होंने एक होम वर्क दिया था। जिसको राज कर के नहीं आया था। और राज को पता था की आज प्रिंसिपल उसको बहुत मारेंगे। तभी उसके क्लास में एक सर जी आये और बोले की इस क्लास से जिसको भी कायकर्म में भाग लेना है वह चले। तभी राज सोचा की अगर मै चला जाऊंगा तो बच जाऊंगा और एहि सोच कर वह चला गया कार्यक्रम में भाग लेने। फिर वहा पर जाके उसके कार्यक्रम वाले सर से कहा की मुझे भी कार्यक्रम में भाग लेना है। तब सर जी बोले की क्या कार्यक्रम करोगे। तब राज बोला की मै गाना गाऊंगा। फिर उसके सर बोले की एक गाना गा के सुनावो तुम्हारा आवाज चेक किये जाये। तब वह एक गाना गाया। और इतना अच्छा गाया की सब लोग उसकी तारीफ करने लगे। फिर कुछ दिन बाद गाँधी जयंती भी आ गया और स्कूल का कार्यकर्म भी हो गया। और तब से राज को स्कूल का बच्चा बच्चा जानने लगा और अब राज पुरे स्कूल में फेमश हो गया। और फिर धिरे धिरे वह ईयर भी ख़त्म हो गया एक महीने की गर्मी की छुट्टी भी हो गई।

फिर जब एक महीने बाद स्कूल खुला तो बहुत बच्चे स्कूल छोड़ चुके थे और कुछ नए बच्चे आ गए थे। लेकिन राज अभी भी वही पर पढाई कर रहा था। और राज अब क्लास 5 में आ गया था। फिर एक दिन की जब राज स्कूल गया तो वहा पर उसने एक नई लड़की देखि अपने क्लास में जो देखने में बहुत ही खूबसूरत थी। गुलाबी चेहरा काली काली आँखे एकदम एक हीरोइन की जैसे दिख रही थी। जब राज ने उसको देखा तो वह उसे देखता ही रहा गया। क्यों की उसे बहुत अच्छी लग रही थी। फिर क्लास चालू हुआ सर जी लोग आये और क्लास लेना चालू किया। फिर सर जी सबसे उसका नाम पूछने लगे फिर जब उस लड़की से नाम पूछा गया तो उसने अपना नाम गुड़िया बताया। (वही गुड़िया जो उसके मौहल्ले में रहती थी लेकिन दोनों ने एक दूसरे को कभी देखा नहीं था ) अब उसका नाम सुन कर राज बहुत खुश हुआ। और अब वह धिरे धिरे उससे दोस्ती करने का सोचने लगा। लेकिन राज उससे डरता भी था की वह कही बुरा न मान जाये इस लिए उससे कुछ बोलता भी नहीं था। और अब उसे बस देखता रहता और मन ही मन खुश होता रहता। उसी क्लास में राज का एक दोस्त था जिसका नाम था लक्की और लक्की बहुत ही तेज तरार लडक था। वह कभी भी किसी से बिना किसी वजह के भी झगड़ा कर लेता था। लेकिन पढ़ने में सही नहीं था। और राज पढ़ने में सही था लेकिन झगड़ा नहीं किया करता था किसी से। ऐसी लिए दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी एक झगड़ा में और एक पढाई में।

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एक दिन की बात है राज जब स्कूल गया तो देखा की क्लास में गुड़िया नहीं आई है। तब उसके अपने दोस्त से पूछा की लक्की गुड़िया आज आई नहीं है क्या। फिर लक्की बोला की नहीं वह तो नहीं आई है तुम क्यों पूछ रहे हो। तब राज बताया की यार लक्की मै उसको बहुत पसंद करता हु वह मुझे बहुत अच्छी लगती है। इतना सुन कर लक्की जोर जोर से हँसने लगा और कहा की सच्ची में तुम उसको पसंद करते हो तब राज बोला की सच्ची में भाई मै उसे बहुत पसंद करता हु। तुम कुछ करो न मेरी उससे बात करवा न। तब लक्की बोला की ठीक है आने दे उसको मै उससे बात करता हु। तब राज बोला की नहीं भाई तुम बात मत करना मै खुद बात करूँगा तब लक्की बोला की सोच लो अगर तुम बात नहीं कर पाए तो मै बात करूँगा। तब राज बोला की ठीक है। मै बात कर लूंगा। फिर अब जब शाम हो गया और स्कूल में बंद हो गया तो सब लोग अपने अपने घर चले गए और राज भी अपने घर चला गया।

फिर दूसरे दिन जब स्कूल खुला और सब लोग स्कूल में पहुंचे तो देखा की गुड़िया भी आई है और क्लास में बैठी है। उसको देख कर राज बहुत खुश हुआ। और फिर क्लास चालू हो गया। और फिर चार घंटी पढ़ने के बाद लंच हुआ तो सब लोग खाना खाये और फिर जब पांचवी घंटी बजी तो राज के एक सर थे उन्होंने ने बोला की आज क्लास बाहर पेड़ के निचे होगा। तो सब लोग अपना अपना कॉपी किताब लेके पेड़ के निचे पहुंच गए। और गुड़िया भी पहुंची। और जहा पर राज बैठा था एकदम उसी के बगल में जाके बैठ गई और उसके पैर के ऊपर अपना पैर भी रख दिया। इतना सब देख कर राज के खुसी का ठिकाना ही नहीं रहा और वह ख़ुशी के मारे कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। और उसके बगल में उसका दोस्त था वह उसको चिड़ा रहा था और उसको आखो आँखों में इसारे कर रहा था। फिर जब क्लास खत्म हुआ तब उसका दोस्त लक्की अब उसे चढ़ाने लगा की देखो वह भी तुमको पसंद करती है तभी तुम्हारे पास में बैठी थी और तुम्हारे पैर के ऊपर अपना पैर रखी थी। अब राज को उससे और भी ज्यादा लगाव होने लगा। और अब राज क्लास 8 में आ चूका था।

फिर एक दिन राज ने गुड़िया को एक लव लेटर दिया लेकिन गुड़िया उसके लव लेटर को बिना पढ़े ही उसे वापस कर दिया और बोला की मै तुमको नहीं किसी और को पसंद करती हु। इतना सुनते ही राज के पैरो तले जमीन खिसक गई। और राज वहा से चल गया। गुड़िया उसी के क्लास में एक लड़का पढ़ता था उसको पसंद करती थी और उसको एक बार लव लेटर भी दी थी जिससे वह लड़का भी उसको पसंद करने लगा था। लेकिन राज तो उससे सच्चा प्यार करता था और वह उसके बिना नहीं रह सकता था। लेकिन वह कुछ नहीं किया और फिर अपने पढाई में मन लगाने लगा। लेकिन कहते है की जब किसी से सच्चा प्यार हो जाता है तो खाना पीना और पढ़ाई कुछ अच्छा नहीं लगता। और वह बहुत उदास रहने लगा। फिर एक दिन लक्की ने उसे बहुत समझाया और बोला की राज तुम चिंता क्यों करते हो अरे ये नहीं तो कोई और सही अपने क्लास में लड़कियों की कमी है तुम क्यों उदास हो उसका चक्कर छोड़ो और किसी दूसरे को देखो। लेकिन राज बोला की नहीं यार लक्की मुझे गुड़िया की पसंद है अगर ये नहीं मिली तो मुझे कोई और नहीं चाहिए। और इतना कह कर वह वहा से चला गया। अब उसकी ये हालत लक्की को देखा नहीं जा रहा था। तो वह गुड़िया के पास गया और उसे उसे सारी बात बताई तब गुड़िया बोली की देखो लक्की मेरे पर ज्यादा प्रेसर मत बनाओ तुम्हारा दोस्त देखने भी स्मार्ट नहीं है और उसके पास पैसा भी नहीं है तो वह मेरे साथ कैसे रहेगा। फिर लक्की वहा से चला गया और धिरे धिरे क्लास 8 भी कम्प्लीट हो गया। और फिर गर्मी की छुट्टी हो गई।

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फिर एक महीने बाद जब स्कूल खुला तो अब राज क्लास 9 में आ गया था और गुड़िया भी और लक्की भी। एक दिन जब राज और लक्की अपने क्लास में बैठे थे तभी उसी क्लास में एक और लड़की आई जो देखने में गुड़िया से भी स्मार्ट थी। और वह अब राज को पसंद भी करने लगी थी और फिर धिरे धिरे वह राज से दोस्त कर ली। फिर राज सोचा की इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा चलो गुड़िया को अब जलाते है। एहि सोच कर राज भी उस लड़की से दोस्ती कर लिया। और अब दोनों साथ में आने जाने लगे और अपना लंच भी एक साथ ही करते थे। अब ये सब देख कर गुड़िया को बहुत जलन होता था। और वह सोचती थी राज तो मुझसे प्यार करता था तो फिर अब इस लड़की से क्यों। और राज भी अब उसे रोज रोज जलाने लगा। फिर एक दिन गुड़िया ने लक्की से कहा की सुनो लक्की राज से बोल दो की वह उस लड़की से दूर रहे नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। तब लक्की बोला की तुम कौन हो उसको ये सब कहने वाली उसकी मर्जी वो चाहे जिससे बात करे जिसके साथ रहे तुमको उससे क्या। और जब तुम किसी के साथ रहती हो तो वो तो कुछ नहीं बोला और तुम होती कौन हो उसको रोकने वाली। फिर गुड़िया बोली की देखो मुझे ये सब नहीं पता बस उसको मना कर दो उसके साथ नहीं रहे। और कह कर चली गई वहा से।

फिर दूसरे दिन जब सब लोग स्कूल पहुंचे तो लक्की ने ये सब बात राज को बताया की राज सुनो गुड़िया तुम्हारे बारे में ऐसा ऐसा बोल रही थी। और कह रही थी उसको बोल दो की वह उससे दूर रहे नहीं तो अच्छा नहीं होगा। इतना सुन कर राज को बहुत तेज से हसी आई और उसके सारी बात लक्की से बताया की मै तो उसी को जलाने के लिए ही ये सब कर रहा था। चलो उसको मेरे प्यार की पहचान तो हुई और उसे मेरी कमी महसूस तो हुई। फिर राज गुड़िया के पास गया और पूछा की तुमको क्या प्रॉब्लम है मै किसी के साथ रहु। तुम क्यों परेशान हो तुम भी तो किसी से प्यार करती हो। मैंने तो कभी नहीं तुमको कुछ कहा तो तुम क्यों मेरी और उसकी बिच में आ रही हो मै तो कभी नहीं आया तुम्हारे और उसके बिच में। मैंने तुमको जब लव लेटर दिया तो तुमने मुझे माना कर दिया तो अब क्यों परेशान हो। और इतना बोला कर वह वहा से जाने लगा। तभी गुड़िया ने उसका हाथ पकड़ लिया और जोर जोर रोने लगी और रोते हुए कहने लगी की राज मुझे माफ़ कर दो मैंने तुमसे उस दिन मजाक किया था मै तो तुमसे बचपन में जब पहली बार स्कूल में आई थी। और तुमको देखा था। और जैसे तुम मुझे देख रहे थे। तभी से तुमसे प्यार करने लगी थी और जिस दिन तुमने मुझे लव लेटर दिया था। मै इतनी खुश थी की पूछो मत। लेकिन मेरी सहेली ने मुझसे कहा की इतना प्यार करने वाला सायद ही किसी को मिले एक काम करो की राज को थोड़ा परेशान करो और मैंने तो यही सोच कर तुमको माना किया था। लेकिन जिस दिन से मैंने तुमको माना किया तुमने तो मुझे एक बार भी बात तक नहीं किया। और तुम उस लड़की के साथ घूमने लगे तो मेरी सहेली ने कहा की राज अब तुमसे प्यार नहीं करता है।

फिर मैंने भी सोचा की सायद अब तुम उससे प्यार करते हो। और फिर जोर जोर से रोने लगी। और बोली की तुम ही बताओ मै करती फिर राज ने उसको अपने लगे से लगा लिया और बोला की अरे पगली मै तो तुमको जलाने के लिए उसके साथ में और ये बात उस लड़की को भी पता है। फिर गुड़िया और रोने लगी और बोली की आइंदा मेरे साथ ऐसा मजाक मत करना मै तुमसे बहुत प्यार कराती हु। तुम वादा करो की तुम ऐसा नहीं करोगे कभी भी। तब राज बोला की मै अपनी पूरी जीवन तुम्हरे साथ बिता दूंगा लेकिन ऐसा कभी नहीं करूंगा और इतना बोल कर उसको फिर से अपने बाहो में भर लिया और पुरे क्लास में तालिया बजने लगी। फिर दोनों ख़ुशी खुसी अपना पढाई करने लगे। और दोनों एक दूसरे के साथ ख़ुशी पूर्वक रहने लगे।

लेखक:- रत्नेश चौहान

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